अल्लाह एक है, वह सबका सहारा है : अनस नक्शबंदी
इस्लामी भाईयों व बहनों के लिए कुरआन शरीफ का विशेष व्याख्यान
गोरखपुर। इस्लामी भाईयों व बहनों के लिए मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद में कुरआन शरीफ के विशेष व्याख्यान के तहत सूरह लहब, सूरह इखलास व सूरह फलक की व्याख्या की गई।
मुख्य वक्ता मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सूरह लहब कुरआन शरीफ की 111वीं सूरह है। इसमें कुल 5 आयतें हैं। सूरह मुख्य संदेश यह है कि घमंड, धन-दौलत और रिश्तेदारियां अल्लाह के अजाब से नहीं बचा सकती। यदि कर्म गलत हैं, तो निकटता भी काम नहीं आती। जो लोग सच्चाई का मजाक उड़ाते हैं और विरोध करते हैं, वे अंततः बर्बाद हो जाते हैं। अबू लहब पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सगा चाचा था इसके बावजूद, अल्लाह के रसूल का करीबी रिश्तेदार होना भी उसे अल्लाह की सज़ा से नहीं बचा सका। जो लोग जुल्म और नफरत फैलाने में दूसरों का साथ देते हैं, वे भी बराबर के गुनहगार होते हैं और सजा के हकदार बनते हैं। यह सूरह भरोसा दिलाती है कि हक (सच्चाई) के रास्ते में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, आखिरी जीत सच्चाई की ही होती है और बुराई का मिटना तय है।
उन्होंने आगे कहा कि सूरह इखलास पवित्र कुरआन की 112वीं सूरह है। जिसमें कुल 4 आयतें हैं। इसका संदेश अत्यंत गहरा और महत्वपूर्ण है। इस सूरह में तौहीद का स्पष्ट वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि अल्लाह एक है, वह सबका सहारा है, न वह किसी की संतान है और न ही उसकी कोई संतान है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि उसके समान कोई नहीं है। सूरह इखलास इस्लाम की बुनियादी आस्था का संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावशाली परिचय है। यह सूरह इखलास इंसान के दिल में अल्लाह की महानता, उसकी यकताई और उसके प्रति सच्ची इबादत का जज़्बा पैदा करती है। यह सूरह हर मुसलमान को केवल अल्लाह की इबादत, उसी पर भरोसा रखने और शिर्क से बचने का संदेश देती है।
विशिष्ट वक्ता हाफिज रहमत अली ने बताया कि सूरह फलक कुरआन शरीफ की 113वीं सूरह है। जिसमें 5 आयतें हैं। जिस तरह अंधेरे को चीरकर सुबह की रोशनी आती है, उसी तरह अल्लाह हर परेशानी और अंधेरे से अपने बंदों को बाहर निकालता है। सूरह फलक अल्लाह की तरफ से एक बेहतरीन तोहफा और शक्तिशाली सुरक्षा कवच है। किसी भी डर, संकट या अनदेखी ताकत से बचने के लिए केवल अल्लाह की शरण लेनी चाहिए। यह सूरह इंसान को हर ज्ञात और अज्ञात खतरे से महफूज रखती है। यह सूरह सिखाती है कि मुश्किल या डर के वक्त सबसे पहले अल्लाह को याद करना चाहिए। हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह की पनाह में आने के बाद कोई भी बुरी ताकत आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इस सूरह का एक बहुत बड़ा पैगाम ‘हसद’ यानी जलन की बुराई से बचना है।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़ मुल्क में आपसी मुहब्बत, भाईचारे व अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। व्याख्यान में आसिफ महमूद, नेहाल अहमद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, शिरीन आसिफ, तानिया अख्तर, शिफा खातून, फिजा खातून, शिफा नूर, नूरजहां शरीफी, असगरी खातून, मुबश्शिरा कुरैशी, मुअज्जमा कुरैशी, रहनुमा, सुमैया आदि मौजूद रहीं।
बच्चों की मासिक काउंसलिंग में अच्छी परवरिश पर दिया गया जोर
गोरखपुर। रविवार को जेएआई एकेडमी गोरखनाथ में बच्चों की मासिक काउंसलिंग के मौके पर बच्चों को उनकी दीनी व अखलाकी परवरिश पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया। वरिष्ठ शिक्षक मुहम्मद आजम ने कहा कि इस्लाम में औलाद अल्लाह तआला की एक बड़ी नेमत और अमानत है। इसलिए हर मां-बाप की जिम्मेदारी है कि वे अपनी औलाद की ऐसी परवरिश करें, जिससे वह नेक, बाअमल और समाज के लिए फायदेमंद इंसान बन सके।
काउंसलिंग के दौरान मुहम्मद अनस ने बच्चों को पांच वक्त की नमाज की पाबंदी, कुरआन-ए-करीम की तिलावत, सच बोलने, वालिदैन की फरमाबरदारी, उस्ताद का एहतराम, सफाई, अच्छे अखलाक, सब्र, शुक्र और आपसी मोहब्बत की तालीम दी। उन्हें यह भी समझाया कि झूठ, गाली-गलौज, बदअखलाकी, नाफरमानी और बुरी संगत से हर हाल में बचना चाहिए। वरिष्ठ शिक्षक अली अहमद ने कहा कि बच्चों की तरबियत केवल तालीम तक सीमित नहीं, बल्कि उनके ईमान, अखलाक और किरदार की इस्लामी बुनियाद को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद ने वालिदैन से अपील की कि वे अपने बच्चों के लिए खुद भी अच्छा नमूना बनें और घर का माहौल दीनदार, मोहब्बत भरा और इस्लामी तालीम के अनुकूल रखें। अंत में बच्चों ने नेक अखलाक अपनाने, दीन की तालीम पर अमल करने और अपने किरदार को इस्लामी उसूलों के मुताबिक संवारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आयशा खातून, शीरीन आसिफ, आयशा आबिद, तानिया अख्तर, नाजिया, हस्सान, यासफीन, एबा, जोया, हादी, अब्दुस्समद सहित तमाम बच्चे मौजूद रहे।




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