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उम्मत की भलाई के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम ने उठाई हर तकलीफ, उनकी जिंदगी हमारे लिए मुकम्मल नमूना : डॉ. खालिद अय्यूब

उम्मत की भलाई के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम ने उठाई हर तकलीफ, उनकी जिंदगी हमारे लिए मुकम्मल नमूना : डॉ. खालिद अय्यूब

जाफरा बाजार में पांचवीं मोहसिन-ए-आजम कांफ्रेंस, मुफ्ती रईस अख्तर मिस्बाही को ‘सब्जपोश अवॉर्ड’ से किया गया सम्मानित

सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 में सहयोग करने वाले बच्चों को भी मेडल, शील्ड और पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला

गोरखपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत इंसानियत के लिए रहनुमाई का मुकम्मल नमूना है। आपने अपनी पूरी जिंदगी तौहीद, इंसानियत की रहनुमाई, हक की दावत, अच्छे अखलाक और उम्मत की भलाई के लिए गुजार दी। मक्का के कठिन और विपरीत हालात में तरह-तरह की तकलीफें सहने के बावजूद आपने हिदायत और भलाई का मिशन नहीं छोड़ा। आपकी जिंदगी का हर पहलू इंसान को मुश्किल परिस्थितियों में भी सत्य, न्याय, धैर्य, करुणा और मानवता के रास्ते पर कायम रहने की प्रेरणा देता है। ये बातें तहरीक उलमा-ए-हिंद राजस्थान के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहीं।

वह सब्जपोश हाउस मस्जिद, जाफरा बाजार के मैदान में आयोजित पांचवीं मोहसिन-ए-आजम कांफ्रेंस को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। अकीदत और एहतराम के माहौल में आयोजित कांफ्रेंस में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान बाराबंकी के शिक्षक एवं लेखक मुफ्ती रईस अख्तर मिस्बाही को दीनी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पांचवें ‘सब्जपोश अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। उन्हें फूलों के साथ सम्मान पत्र और शील्ड पेश की गई। वहीं, सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 में सहयोग करने वाले बच्चों को मेडल, शील्ड और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

डॉ. खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी जिंदगी का हर पल इंसानियत की भलाई और लोगों को सही रास्ता दिखाने में गुजार दिया। आपने लोगों को अंधकार से निकालकर हिदायत की रोशनी की तरफ बुलाया और समाज में इंसाफ, भाईचारा, अमन, मोहब्बत तथा अच्छे व्यवहार की बुनियाद मजबूत की।

उन्होंने कहा कि मक्का का दौर बेहद कठिन था। विरोध, तकलीफ और मुश्किलों के बावजूद पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ अपने मिशन से पीछे नहीं हटे। आपने व्यक्तिगत कठिनाइयों को कभी अपनी दावत और उम्मत की भलाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। यही आपकी सीरत का वह पहलू है, जो हर दौर के इंसान को संघर्ष के बीच अपने उद्देश्य पर मजबूती से कायम रहने का संदेश देता है।

मुख्य वक्ता ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत बनकर आए। आपकी जिंदगी में पड़ोसियों के अधिकार, माता-पिता का सम्मान, जरूरतमंदों की मदद, कमजोरों के प्रति हमदर्दी, बच्चों से मोहब्बत, बड़ों का अदब और समाज में इंसाफ कायम करने की स्पष्ट शिक्षा मिलती है। इसलिए सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ का अध्ययन केवल धार्मिक जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके संदेश को व्यावहारिक जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज नई पीढ़ी अनेक तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। तकनीक और सोशल मीडिया ने दुनिया को करीब जरूर किया है, लेकिन साथ ही समाज में अनेक प्रकार की नैतिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे दौर में बच्चों और नौजवानों को आधुनिक शिक्षा के साथ दीनी तालीम, अच्छे अखलाक, सच्चाई, ईमानदारी, अदब और इंसानियत की सेवा का संदेश देना बेहद जरूरी है।

डॉ. खालिद अय्यूब ने कहा कि अगर नई पीढ़ी पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत को समझकर अपनी जिंदगी में उतार ले तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें व्यवहार और चरित्र की शिक्षा भी दें। बच्चों में दूसरों के अधिकारों का सम्मान, बुजुर्गों का अदब, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सीरतुन्नबी ﷺ से जुड़े कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक और नैतिक चेतना पैदा करने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने नबी की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को जानने, समझने और उस पर विचार करने का अवसर मिलता है।

सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ समाज के लिए रहनुमाई का मुकम्मल आईना

कांफ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की पूरी जिंदगी उम्मत के लिए रहनुमाई का मुकम्मल आईना है। आपने उम्मत की कामयाबी और भलाई के लिए हर स्तर पर फिक्र की और इंसानों को अंधकार से निकालकर हिदायत की रोशनी दिखाई।

उन्होंने कहा कि सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ को अपनी जिंदगी में अपनाने से इंसान के व्यवहार और चरित्र में बेहतर बदलाव आता है। अगर समाज के लोग पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की शिक्षाओं के मुताबिक अपने आचरण को ढाल लें तो आपसी मोहब्बत, भाईचारा, अमन और इंसाफ को मजबूत किया जा सकता है।

शहर काजी ने कहा कि आज समाज को ऐसी शिक्षा की जरूरत है, जो इंसान को केवल ज्ञानवान ही नहीं बल्कि अच्छे चरित्र वाला भी बनाए। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उसके साथ इंसान के भीतर विनम्रता, जिम्मेदारी, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव पैदा हो। पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत हमें यही शिक्षा देती है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता, पड़ोसी, रिश्तेदार, कमजोर, गरीब और जरूरतमंद समेत समाज के हर वर्ग के साथ अच्छा व्यवहार करना सीरत-ए-मुस्तफा का अहम संदेश है। इस संदेश को घर-घर और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।

मुफ्ती रईस अख्तर मिस्बाही को ‘सब्जपोश अवॉर्ड’

कांफ्रेंस में बाराबंकी के शिक्षक एवं लेखक मुफ्ती रईस अख्तर मिस्बाही को दीनी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘सब्जपोश अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। उन्हें फूलों के साथ सम्मान पत्र और शील्ड पेश की गई। सम्मान मिलने पर उपस्थित लोगों ने उनका स्वागत किया और उनके दीनी एवं शैक्षिक कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि समाज में दीनी शिक्षा और सकारात्मक लेखन के जरिए नई पीढ़ी को सही दिशा देने वाले लोगों का सम्मान करना उत्साहवर्धन का काम करता है। ऐसे सम्मान से शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वालों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

बच्चों को सम्मानित कर बढ़ाया उत्साह

कांफ्रेंस के दौरान सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 में सहयोग करने वाले बच्चों को भी मेडल, शील्ड और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों को सम्मानित करने का उद्देश्य उनमें दीनी जानकारी के साथ सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों के प्रति उत्साह पैदा करना रहा।

आयोजकों ने कहा कि बच्चों और युवाओं को सीरत-ए-पाक से जोड़ना आज के दौर की अहम जरूरत है। प्रतियोगिताओं और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनमें अध्ययन, लेखन और धार्मिक ज्ञान के प्रति रुचि पैदा की जा सकती है। बच्चों को मंच पर सम्मान मिलने से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे भविष्य में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं।

कुरआन की तिलावत से हुआ आगाज

कांफ्रेंस का आगाज कारी शरफुद्दीन मिस्बाही की कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद नात-ए-पाक का नजराना पेश किया गया। हाफिज रहमत अली, कासिद रजा इस्माइली, मौलाना महमूद रजा कादरी, हाफिज आरिफ, मो. जैद आदि ने नात-ए-पाक पेश कर महफिल को नूरानी बना दिया। नात के दौरान मौजूद लोगों ने अकीदत के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

कार्यक्रम के संयोजक हाफिज रहमत अली निजामी ने मेहमानों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही और सम्मानित अतिथि मुफ्ती रईस अख्तर मिस्बाही को खानकाहे सब्जपोश की मुख्तसर तारीख और उसकी धार्मिक एवं सामाजिक सेवाओं से अवगत कराया।

अमन, सलामती और तरक्की के लिए हुई दुआ

कांफ्रेंस के अंत में दुरूदो सलाम पढ़ा गया। इसके बाद मुल्क, कौम और उम्मत की सलामती, अमन, खुशहाली और तरक्की के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने समाज में शांति, आपसी भाईचारे और इंसानियत के जज्बे को मजबूत करने का संकल्प लिया।

कांफ्रेंस का संचालन कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलमा, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया।

इस मौके पर मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, आसिफ महमूद, हाफिज सद्दाम हुसैन, हाफिज आमिर हुसैन, इरफान अहमद, हाफिज खैरुलवरा, हाफिज आफताब आलम, हाफिज मिनहाजुद्दीन, हाजी रफीउल्लाह, शहनवाज आलम, मो. यूसुफ, आकिब, शहनवाज अहमद, मुहम्मद आजम, शहबाज सिद्दीकी, महबूब आलम, नवेद आलम, शीराज सिद्दीकी, ताबिश सिद्दीकी, एडवोकेट आजम, आसिफ, शादाब अहमद, सलमान खान, रुशान, आरिफ, तारिक सामानी, मकसूद, सैयद इरशाद, शकील आदि मौजूद रहे।

कांफ्रेंस में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत किसी एक दौर या किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर दौर के इंसान के लिए रहनुमाई का स्रोत है। आपकी जिंदगी में इबादत के साथ इंसानियत, इल्म के साथ अखलाक, अधिकारों के साथ जिम्मेदारी और मुश्किलों के बीच सब्र का संदेश मिलता है। इसलिए जरूरत है कि सीरत-ए-मुस्तफा को महज कार्यक्रमों और तकरीरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसके संदेश को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए।

पांचवीं मोहसिन-ए-आजम कांफ्रेंस इसी संदेश के साथ संपन्न हुई कि नई पीढ़ी को सीरत-ए-रसूल ﷺ से जोड़कर उसे बेहतर चरित्र, अच्छे अखलाक, दीनी समझ और इंसानियत की सेवा की राह पर आगे बढ़ाया जाए। वहीं, दीनी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वालों का सम्मान और बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहन समाज में सकारात्मक शैक्षिक एवं नैतिक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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