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नौजवानों की सोच और किरदार से तय होगा समाज का भविष्य : मुफ्ती अख्तर हुसैन

नौजवानों की सोच और किरदार से तय होगा समाज का भविष्य : मुफ्ती अख्तर हुसैन

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी संगोष्ठी, मौजूदा चुनौतियों से निपटने के इस्लामी तरीकों पर हुई चर्चा

गोरखपुर। बदलते दौर में नौजवानों के सामने पैदा हो रही चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। “मौजूदा चैलेंजेस और नौजवान : इस्लामी नुक्ते नजर से समाधान” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने आधुनिक दौर की परिस्थितियों, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, बदलती जीवनशैली और नौजवानों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि नौजवानों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी जानकारी के साथ दीनी तालीम, अच्छे अखलाक और मजबूत किरदार से भी जोड़ना समय की अहम जरूरत है।

मुख्य वक्ता मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि नौजवान किसी भी समाज और कौम की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। उनकी सोच, मेहनत और किरदार ही आने वाले समय के समाज की दिशा तय करते हैं। मौजूदा दौर में नौजवानों के सामने शिक्षा और रोजगार के साथ सोशल मीडिया, बदलती जीवनशैली, सामाजिक दबाव और नकारात्मक प्रभाव जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे हालात में उन्हें सही मार्गदर्शन देना अभिभावकों और समाज के जिम्मेदार लोगों की बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम इंसान को हर दौर के हालात में संतुलित और जिम्मेदार जिंदगी जीने की शिक्षा देता है। नौजवान अगर कुरआन-ए-पाक की शिक्षाओं, पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम की सीरत और नेक लोगों की जिंदगी को अपना मार्गदर्शक बनाएं तो वे मुश्किल परिस्थितियों का मजबूती से सामना कर सकते हैं। दीनी तालीम इंसान को केवल धार्मिक जानकारी नहीं देती, बल्कि अच्छे अखलाक, अनुशासन, जिम्मेदारी और इंसानियत का एहसास भी कराती है।

मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि नौजवानों की समस्याओं को केवल डांट-फटकार से हल नहीं किया जा सकता। अभिभावकों को उनके साथ दोस्ताना माहौल में बातचीत करनी चाहिए और उनकी परेशानियों को समझना चाहिए। परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर नौजवानों की बेहतर तरबियत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में सावधानी बरतने पर भी जोर दिया। कहा कि तकनीक अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल उसे अच्छा या बुरा बनाता है। नौजवान सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल शिक्षा, ज्ञान, सकारात्मक गतिविधियों और समाज सेवा के लिए करें। अपने समय और क्षमताओं को बेकार की गतिविधियों में गंवाने के बजाय भविष्य को बेहतर बनाने में लगाएं।

उन्होंने कहा कि नौजवानों में आत्मविश्वास, अनुशासन, जिम्मेदारी और इंसानियत की भावना पैदा करना जरूरी है। उन्हें नशे, बुरी संगत, गलत सामग्री और निराशाजनक सोच से बचाने के साथ शिक्षा, सकारात्मक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत किरदार ही इंसान की असली पहचान है। शिक्षा के साथ व्यवहार और आचरण को बेहतर बनाना भी जरूरी है।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि नौजवान केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि समाज के भविष्य में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें अपने हुनर और ऊर्जा का इस्तेमाल समाज की बेहतरी, जरूरतमंदों की मदद और अमन व भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए। नौजवानों को सही वातावरण और सकारात्मक अवसर उपलब्ध कराना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

संगोष्ठी की शुरुआत हाफिज रहमत अली निजामी ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से की। इसके बाद मुख्य वक्ता ने विषय के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए नौजवानों के लिए दीनी और सामाजिक मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया।

कार्यक्रम में हाजी फैज खान, मो. जीशान, मो. जैद, हाजी बदरुल हसन, सैयद जव्वाद अली, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ, मो. आरिफ, मो. हसन, रोशन, कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, अफसर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

अंत में देश और समाज में अमन, भाईचारे, खुशहाली तथा नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि मौजूदा दौर में ऐसे कार्यक्रम नौजवानों को सही दिशा देने, उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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