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एआई और सोशल मीडिया के दौर में इल्म के साथ अखलाक भी जरूरी : डॉ. खालिद अय्यूब मिस्बाही

एआई और सोशल मीडिया के दौर में इल्म के साथ अखलाक भी जरूरी : डॉ. खालिद अय्यूब मिस्बाही

जव्वाद अली शाह पीजी कॉलेज व इस्लामिया गर्ल्स इंटरमीडिएट कॉलेज में छात्राओं की विशेष काउंसलिंग

गोरखपुर। मौजूदा दौर तेजी से बदल रहा है। नई तकनीक, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बदलते सामाजिक माहौल और शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी है। सही सोच, मजबूत चरित्र और सकारात्मक दृष्टिकोण के जरिए ही आने वाली चुनौतियों का बेहतर मुकाबला किया जा सकता है। यह बातें तहरीक उलमा-ए-हिंद राजस्थान के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने छात्राओं की काउंसलिंग के दौरान कहीं।

जव्वाद अली शाह पीजी कॉलेज, मियां बाजार, इस्लामिया गर्ल्स इंटरमीडिएट कॉलेज, जाहिदाबाद, गोरखनाथ और मकतब इस्लामियात, तुर्कमानपुर में छात्राओं के लिए विशेष काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही और कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें शिक्षा, भविष्य, चरित्र निर्माण, एआई और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़ी चुनौतियों के संबंध में मार्गदर्शन दिया।

डॉ. खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर पूरी मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मुश्किल परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेने की जरूरत है। सब्र, मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाकर युवा अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को मौजूदा दौर की महत्वपूर्ण तकनीकी शक्ति बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एआई से घबराने के बजाय इसे समझने और इसके सकारात्मक इस्तेमाल का तरीका सीखना चाहिए। एआई शिक्षा, शोध, लेखन और ज्ञान हासिल करने में उपयोगी साधन बन सकता है, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी सोच और मेहनत की जगह पूरी तरह तकनीक पर निर्भर नहीं होना चाहिए। तकनीक इंसान की मदद के लिए है, इंसान की सोच और जिम्मेदारी का विकल्प नहीं।

उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि एआई के जरिए मिलने वाली हर जानकारी को आंख मूंदकर सही न मानें, बल्कि उसे समझें, जांचें और अपनी बुद्धि एवं विवेक का इस्तेमाल करें। खास तौर पर पढ़ाई और असाइनमेंट में एआई का इस्तेमाल सीखने और समझने के लिए किया जाना चाहिए, न कि मेहनत से बचने के लिए।

उन्होंने सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विद्यार्थियों को सावधान किया। कहा कि मोबाइल और इंटरनेट ज्ञान हासिल करने के उपयोगी साधन हैं, लेकिन इनका अनावश्यक और गलत इस्तेमाल विद्यार्थियों के समय, सोच और भविष्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए तकनीक, सोशल मीडिया और एआई का इस्तेमाल जरूरत, उद्देश्य और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने या डिग्री हासिल करने का नाम नहीं है, बल्कि शिक्षा का असली उद्देश्य इंसान के अंदर समझ, जिम्मेदारी और अच्छे आचरण को पैदा करना है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करते हुए अपने चरित्र को मजबूत बनाना चाहिए।

कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी जरूरत सही मार्गदर्शन की है। परिवार और शिक्षण संस्थानों को बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी मानसिक और सामाजिक जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए। समय-समय पर बच्चों से बातचीत और काउंसलिंग उन्हें कई गलत रास्तों से बचा सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने समय की कद्र करने, मेहनत से पढ़ाई करने और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहने की सलाह दी। कहा कि सफलता हासिल करने के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और मजबूत इरादे भी जरूरी हैं।

काउंसलिंग के दौरान छात्राओं ने शिक्षा, करियर, एआई, भविष्य और मौजूदा दौर की विभिन्न चुनौतियों से जुड़े सवाल किए। दोनों वक्ताओं ने छात्राओं के सवालों का जवाब दिया और उन्हें सकारात्मक, संतुलित एवं जिम्मेदार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।

काउंसलिंग कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि आने वाले समय की चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए युवाओं को इल्म, अमल, अच्छे अखलाक, तकनीकी समझ और मजबूत चरित्र से लैस होना होगा। आधुनिक शिक्षा और एआई जैसी नई तकनीकों का सकारात्मक इस्तेमाल करते हुए नैतिक एवं धार्मिक मूल्यों को अपनाकर ही एक बेहतर समाज और मजबूत भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

इस दौरान जव्वाद अली शाह पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शगुफ्ता अमान, इस्लामिया गर्ल्स इंटरमीडिएट कॉलेज की प्रधानाचार्या शम्सा अंसारी, मैनेजर मकसूद अंसारी, फहमीदा, मुसर्रत, सना, गौहर, आलिया, अदीबा, मंतशा, शबनम, शिरीन, सोनी सोनकर, रंजना, रोशनी सोनकर, रफील अहमद, आसिफ महमूद, नेहाल अहमद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, मुहम्मद आजम, हाजी फैज खान सहित कॉलेज की शिक्षिकाओं व छात्राओं ने हिस्सा लिया।

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