दिलों में मोहब्बत-ए-रसूल, हाथों में क़लम, मक्की जिंदगी पर सजे सीरत के सैकड़ों पन्ने

सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 में बच्चों, युवाओं और बड़ों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, सितंबर के अंतिम सप्ताह में घोषित होंगे विजेता
गोरखपुर। मोहब्बत-ए-रसूल के जज्बे को जब कलम की ताकत मिली तो एमएसआई इंटर कॉलेज, बक्शीपुर में सैकड़ों पन्नों पर सीरत-ए-मुस्तफा की दास्तान उभर आई। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुकद्दस जिंदगी, आदर्श चरित्र, संघर्ष, शिक्षाओं और इंसानियत के पैगाम को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 का आयोजन किया गया। अल कलम ट्रस्ट एवं तहरीक उलमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में गोरखपुर शहर के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों और मकतबों से पहुंचे सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। बच्चों और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बड़ों ने भी प्रतियोगिता में भाग लेकर पैगंबर-ए-इस्लाम की मक्की जिंदगी पर अपने विचार कलमबद्ध किए।

सुबह से ही एमएसआई इंटर कॉलेज, बक्शीपुर का परिसर प्रतिभागियों और उनके अभिभावकों से गुलजार रहा। विभिन्न शिक्षण संस्थानों से पहुंचे प्रतिभागियों में प्रतियोगिता को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। कई प्रतिभागी निर्धारित समय से पहले ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए। अभिभावक अपने बच्चों का उत्साह बढ़ाते नजर आए।
प्रतियोगिता शुरू होने के बाद परीक्षा कक्षों में पूरी तरह शांति और अनुशासन का माहौल रहा। सैकड़ों प्रतिभागियों ने निर्धारित समय में पूरी गंभीरता के साथ निबंध लिखे। किसी के हाथ में कलम तेजी से चल रही थी तो कोई अपने विचारों को शब्दों का रूप देने से पहले विषय के विभिन्न पहलुओं पर चिंतन करता नजर आया। पूरे परिसर में अध्ययन, लेखन और सीरत-ए-मुस्तफा की चर्चा का माहौल बना रहा।

मक्की जिंदगी के हर पहलू को कलम ने किया सलाम
सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 में प्रतिभागियों के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुकद्दस मक्की जिंदगी को विषय बनाया गया था। प्रतिभागियों ने निबंधों में पैगंबर-ए-इस्लाम के जन्म, बचपन, युवावस्था, सच्चाई और अमानतदारी, सामाजिक जीवन, ऐलाने नुबूवत से पहले के जीवन, पहली वह्यी, इस्लाम की दावत, मक्का के कठिन दौर, विरोध और परेशानियों, सहाबा की कुर्बानियों, सब्र और इस्तिकामत जैसे विभिन्न पहलुओं को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया।
कई प्रतिभागियों ने मक्की जिंदगी के उस दौर को विशेष रूप से रेखांकित किया, जिसमें कठिन परिस्थितियों और विरोध के बावजूद सत्य, दया, सहनशीलता और इंसानियत का दामन नहीं छोड़ा गया। निबंधों में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि पैगंबर-ए-इस्लाम की मक्की जिंदगी आज की पीढ़ी के लिए सच्चाई, ईमानदारी, सब्र और संघर्ष की प्रेरणा है।

प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल निबंध लेखन तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रतिभागियों को सीरत पढ़ने, उसके विभिन्न पहलुओं को समझने और उससे मिलने वाली नैतिक शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करना भी था।
सीरत से नई नस्ल को जोड़ना मकसद
प्रतियोगिता के संयोजक कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की पूरी जिंदगी इंसानियत के लिए एक मुकम्मल नमूना है। आपकी शिक्षाओं में तौहीद के साथ इंसानियत, अदब, मोहब्बत, न्याय, भाईचारे और नैतिकता का संदेश मिलता है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सीरत के अध्ययन से जोड़ना आज की महत्वपूर्ण जरूरत है। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों और युवाओं में अध्ययन, लेखन और चिंतन की आदत विकसित करने के साथ उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम की मुकद्दस जिंदगी और शिक्षाओं से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
एमएसआई इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, उप प्रधानाचार्य मंजूर अहमद और वरिष्ठ शिक्षक नजमुद्दीन अहमद ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को किताबों और अध्ययन से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, अली अहमद, सैयद नदीम अहमद और सैयद मतीन अहमद ने कहा कि प्रतियोगिता केवल पुरस्कार हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि सीरत पढ़ने, समझने और उससे सीख लेकर जीवन को बेहतर बनाने का अवसर है।

बच्चों के साथ बड़ों ने भी दिखाया उत्साह
सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 की खास बात अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी रही। छात्र-छात्राओं के साथ बड़ी संख्या में बड़ों ने भी मक्की जिंदगी पर निबंध लिखकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
शहबाज सिद्दीकी, शादाब अहमद सिद्दीकी, शाहनवाज अहमद और अब्दुल अहद ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान परीक्षा कक्षों में पूरी तरह शांति और अनुशासन का माहौल रहा। प्रतिभागियों ने निर्धारित समय का सदुपयोग करते हुए अपने निबंध पूरे किए।
हाजी फैज खान ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के अलावा मदरसों और मकतबों से आए प्रतिभागियों की भागीदारी ने प्रतियोगिता को और व्यापक स्वरूप दिया। अलग-अलग संस्थानों के प्रतिभागियों को एक मंच पर आने का अवसर मिला।
डिजिटल दौर में किताब और कलम से जोड़ने की पहल
सैयद फरहान अहमद और मुहम्मद आजम ने कहा कि मौजूदा दौर में बच्चों और युवाओं का काफी समय डिजिटल माध्यमों में गुजर रहा है। ऐसे समय में उन्हें किताब, कलम और अध्ययन से जोड़ना जरूरी है। सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के लिए निबंध तैयार करने के दौरान प्रतिभागियों ने सीरत के विभिन्न पहलुओं को पढ़ा, समझा और उन पर चिंतन किया। इससे उन्हें अपने विचारों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने और लेखन क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिला।
हाजी सेराज अहमद और नवेद आलम ने कहा कि सीरत-ए-मुस्तफा की शिक्षाएं केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन के लिए भी मार्गदर्शन देती हैं। सच्चाई, न्याय, दया, सहनशीलता, जरूरतमंदों की मदद, बड़ों का सम्मान और छोटों से प्रेम जैसे नैतिक मूल्यों की जरूरत हर दौर में बनी रहती है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में घोषित होंगे विजेता
प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद अब प्रतिभागियों को परिणाम का इंतजार है। वरिष्ठ शिक्षक मुजफ्फर हसनैन रुमी, सलमान सर और हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल उत्तर पुस्तिकाओं का निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। सितंबर के अंतिम सप्ताह में विजेताओं की घोषणा की जाएगी।

परिणाम को लेकर प्रतिभागियों और अभिभावकों में उत्सुकता बनी हुई है। आयोजकों ने कहा कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाला प्रत्येक प्रतिभागी अपने आप में विजेता है, क्योंकि उसने सीरत के अध्ययन के लिए समय निकाला और अपने विचारों को कलम के माध्यम से प्रस्तुत किया।
आयशा फसीही, जिक्रा शेख और शबाना ने कहा कि पुरस्कार प्रतिभागियों के उत्साह को बढ़ाने का माध्यम हैं, जबकि सीरत से मिलने वाली सीख वास्तविक उपलब्धि है। यदि प्रतियोगिता के बाद प्रतिभागी सच्चाई, ईमानदारी, अदब, सहनशीलता, भाईचारे और इंसानियत जैसे गुणों को अपनी जिंदगी में अपनाते हैं तो यही आयोजन की सबसे बड़ी सफलता होगी।

आयोजन की सफलता में सहयोगियों की अहम भूमिका
सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 को सफल बनाने में एमएसआई इंटर कॉलेज के प्रबंधन और शिक्षकों के साथ सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने महत्वपूर्ण सहयोग किया। प्रतिभागियों के पंजीकरण, बैठने की व्यवस्था, परीक्षा संचालन और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजन की सफलता में प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, उप प्रधानाचार्य मंजूर अहमद, मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, हाफिज रहमत अली निजामी, नेहाल अहमद, आसिफ महमूद, मोहम्मद आजम, नवेद आलम, हाजी फैज अहमद, शहबाज सिद्दीकी, हाफिज नजरे आलम, पार्षद नूर मोहम्मद, मुहम्मद एख्लाक, मौलाना महमूद रजा, जीशान अहमद, मो. इब्राहीम, उमर, अब्दुल अहद, इं. मिनहाजुद्दीन अंसारी, मुहम्मद सदफ, मोहम्मद शुएब, बेलाल अहमद, कारी नसीमुल्लाह, अली गजनफर शाह, कारी सरफुद्दीन, सैयद नदीम अहमद, शीरीन आसिफ, आयशा खातून, ज्या वारसी, आस्मां खातून, आयशा फसीही, हाजी सेराज अहमद, शहजाद अहमद, जिक्रा शेख, शाहनवाज अहमद, आजम हसन, अनुजा, जेबा, नजमुद्दीन अहमद, सैयद मतीन अहमद, अदीबा, तारिक सामानी, युसूफ, कलीम, अली अहमद, तानिया अख्तर, शादाब अहमद सिद्दीकी, हाफिज आमिर हुसैन, सलमान खान, मौलाना दानिश रजा, मोहम्मद अयान, आमिर लारी, मौलाना नूरुद्दीन और कासिद रजा इस्माइली सहित बड़ी संख्या में लोगों का सहयोग रहा।
इसके अलावा मकतब इस्लामियात चिंगी शहीद इमाम चौक, मकतब इस्लामियात जाफरा बाजार, मदरसा दारूल कुरान तुर्कमानपुर, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ, मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर और आइडियल मैरेज हाउस गाजी रौजा समेत विभिन्न संस्थानों का भी सहयोग रहा।
आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, शिक्षकों, सहयोगियों और स्वयंसेवकों का आभार जताया।
सीरत की सीख को जिंदगी में उतारना ही असली कामयाबी
मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी और मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के प्रधानाचार्य हाफिज नजरे आलम कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की मक्की जिंदगी संघर्ष, सब्र, सत्य, दृढ़ता और अपने मिशन के प्रति अटूट विश्वास की मिसाल है। उनकी जिंदगी इंसानियत और नैतिकता की राह दिखाती है।
मदरसा अंजुमन इस्लामिया खूनीपुर के प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह ने कहा कि समाज में आपसी सद्भाव, भाईचारे, सम्मान और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए सीरत-ए-मुस्तफा की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
एमएसआई इंटर कॉलेज में आयोजित सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-02 की सबसे खास तस्वीर यही रही कि एक ही परिसर में सैकड़ों कलमें चलीं और पैगंबर-ए-इस्लाम की मक्की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को कागज पर उतारा गया। मोहब्बत-ए-रसूल से प्रेरित यह लेखनी केवल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं रही, बल्कि सीरत को पढ़ने, समझने और उसके संदेश को जिंदगी में उतारने की कोशिश भी बनी।
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में प्रतियोगिता का दायरा और बढ़ेगा तथा अधिक से अधिक बच्चे, युवा और बड़े सीरत-ए-मुस्तफा के अध्ययन से जुड़ेंगे। उनका कहना है कि सीरत की रोशनी किताबों से निकलकर नई पीढ़ी के किरदार और व्यवहार में नजर आए, यही इस पहल की असली कामयाबी होगी।




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