इमाम हुसैन की याद में निःशुल्क आयुष्मान कार्ड शिविर का हुआ आयोजन
गोरखपुर। रविवार पांचवीं मुहर्रम को इमाम हुसैन व शुहदाए कर्बला की याद में अल कलम एसोसिएशन व डॉ. इकबाल एजुकेशनल एंड रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में तुर्कमानपुर में 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क आयुष्मान कार्ड पंजीकरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में बुजुर्ग नागरिकों ने भाग लेकर आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अपने आयुष्मान कार्ड बनवाए। शिविर के दौरान पात्र व्यक्तियों के दस्तावेजों का सत्यापन करने के उपरांत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई। उपस्थित लोगों ने इस जनसेवा पहल की सराहना करते हुए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
फाउंडेशन के संस्थापक एडवोकेट मुहम्मद राफे ने कहा कि संस्था समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के कल्याण हेतु समय-समय पर विभिन्न जनसेवा कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना के लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविर सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एसोसिएशन के सदर कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाना संस्था का मुख्य उद्देश्य है। भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। शिविर में मुहम्मद वाजिद, शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, हाफिज रहमत अली निजामी, नेहाल अहमद, मुहम्मद ओबैद रजा, रहमत अली, मुहम्मद सफियान, अब्दुस्समद, मुहम्मद शाद ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
सब्र की मेराज का नाम इमाम हुसैन है : मुफ्ती अख्तर हुसैन
गोरखपुर। पांचवीं मुहर्रम को मस्जिदों व घरों में ‘जिक्रे शुहदाए कर्बला’ महफिलों का दौर जारी रहा। फातिहा ख्वानी हुई। शुहदाए-कर्बला का जिक्र सुनकर सबकी आंखें भर आईं।
बरकाती मस्जिद नौरंगाबाद गोरखनाथ में जिक्रे शुहदाए कर्बला महफिल हुई। जिसमें मुहम्मद अनस ने कहा कि यजीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक से कभी बातिल जीत नहीं सकता। जब परेशानी आए तो सब्र से काम लेना है। वर्तमान दौर में इमाम हसन व इमाम हुसैन की शहादत को याद कर स्वच्छ समाज निर्माण करने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि इमाम हुसैन ने अपने साथियों के साथ यजीद की कई गुना बड़ी फौज के साथ किसी मंसब, तख्त ओ ताज, बादशाहत, किसी इलाके को कब्जाने या धन-दौलत के लिए जंग नहीं की बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन-ए-इस्लाम व इंसानियत को बचाने के लिए जंग की थी।
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इमाम हुसैन ने शहादत देकर इस्लाम धर्म व मानवता को बचा लिया। इमाम हुसैन कल भी जिंदा थे, आज भी जिंदा हैं और सुबह कयामत तक जिंदा रहेंगे। इमाम हुसैन जिंदा हैं हमारी महफिल में, इमाम हुसैन जिंदा हैं हमारी नमाजों में, इमाम हुसैन जिंदा हैं हमारी अजानों में, इमाम हुसैन जिंदा हैं हमारी सुबह में, हमारी शामों में। कत्ले हुसैन असल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।
सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि इमाम हुसैन अपने इल्म, अख्लाक, बहादुरी, तकवा, परहेजगारी, इबादत और किरदार की वजह से बहुत ज्यादा मकबूल हैं। बुराई का नाश करने के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत फातिमा के जिगर के टुकड़े हजरत अली के बेटे इमाम हुसैन, उनके परिवार व साथियों सहित कुल 72 लोगों ने शहादत दी।




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