अल्लाह बहुत दयालु, तौबा करने वालों को करता है माफ : हाफिज रहमत
इस्लामी भाईयों व बहनों का विशेष साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन जारी
गोरखपुर। इस्लामी भाईयों व बहनों के लिए सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद व मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) में सूरह काफिरून व सूरह नस्र की व्याख्या की गई। यह सूरतें मुख्य रूप से बगैर किसी दबाव व समझौते के एक अल्लाह को मानने और कामयाबी पर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करने का सबक देती है।
मुख्य वक्ता मुहम्मद अनस ने कहा कि सूरह काफिरून पवित्र कुरआन की 109वीं सूरह है। इसमें कुल छह आयतें हैं। यह सूरह इस्लाम के बुनियादी अकीदे तौहीद और धार्मिक स्वतंत्रता को स्पष्ट करती है। यह सिखाती है कि मुसलमानों को अपने दीन, ईमान और अकीदे पर बिना किसी समझौते के मजबूती से डटे रहना चाहिए। इबादत सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह की होगी और दीन के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। यह सूरह स्पष्ट करती है कि बुनियादी धार्मिक सिद्धांतों (तौहीद) और ईमान के मामलों में कोई ‘लेन-देन’ या ‘समझौता’ नहीं हो सकता। सत्य और असत्य का कोई मिश्रण नहीं हो सकता। इस सूरह की अंतिम आयत, “तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन है”, वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता का एक महान चार्टर है। सूरह काफिरून का संदेश आज के बहुसांस्कृतिक और विविध समाज के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है, जो हमें अपने धर्म के प्रति वफादार रहते हुए दूसरों के साथ शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का तरीका सिखाता है।
विशिष्ट वक्ता हाफिज रहमत अली ने बताया कि सूरह नस्र पवित्र कुरआन की 110वीं सूरह है। कुल तीन आयतें होने के बावजूद अपने ऐतिहासिक संदर्भ, आध्यात्मिक संदेश और फजीलत के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘नस्र’ का अर्थ अल्लाह की मदद होता है। यह सूरह सिखाती है कि जब इंसान को कोई बड़ी सफलता या विजय मिले, तो उसे अहंकारी होने के बजाय अल्लाह के सामने झुक जाना चाहिए। अल्लाह बहुत दयालु है और तौबा करने वालों को माफ करता है। सच्ची सफलता और विजय केवल अल्लाह की मदद से ही संभव है। जब भी जीवन में बड़ी सफलता, धन या लक्ष्य प्राप्त हो, तो मनुष्य को अहंकारी होने के बजाय अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए। अल्लाह की पाकी बयान करना, उसका शुक्र अदा करना और क्षमा मांगना ही एक सच्चे मुसलमान की पहचान है। जीवन में मिलने वाली कोई भी बड़ी कामयाबी केवल हमारी मेहनत का नतीजा नहीं होती, बल्कि वह अल्लाह की मदद (नस्र) से हासिल होती है। नेक रास्ते पर चलते हुए धैर्य और दृढ़ता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसकी मदद जरूर आती है। जब भी आपको जीवन में कोई बड़ी सफलता या विजय प्राप्त हो, तो उसे अपने अहंकार या बुद्धि का परिणाम न समझें, बल्कि उसे अल्लाह की मदद मानें।




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